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Rajat Sharma's Blog | पंजाब में हत्या: सीबीआई जांच कौन रोक रहा है?

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Oct 15, 2026 12:13 pm IST,  Updated : Oct 15, 2026 12:13 pm IST

पंजाब में नशे के खिलाफ मुहिम चलाने वाला परविंदर जानता था कि मेडिकल स्टोर पर नशा बिकता है। उसके पास सबूत था। मुख्यमंत्री भगवंत मान का ये बयान काफी नहीं है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी, उन्हें इस हत्या के पीछे के ड्रग माफ़िया को expose करना पड़ेगा।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

पंजाब में नशे के खिलाफ मुहिम चलाने वाले परविंदर सिंह के हत्यारे अश्विनी ने कैमरे पर गोलियां चलाई थीं, उसके गुनाह का सबूत सबके सामने है, इसलिए उसका पकड़ा जाना लाज़िमी है। पर सवाल ये है कि क्या अश्विनी कुमार अकेला है या उसके पीछे पंजाब का ड्रग माफिया है? परविंदर ने मेडिकल स्टोर पर जाकर नशे के कारोबारी को चैलेंज किया था।

परविंदर जानता था कि मेडिकल स्टोर पर नशा बिकता है। उसके पास सबूत था। अगर अश्विनी के स्टोर से ड्रग्स पकड़ी जाती तो उसे बताना पड़ता कि ड्रग्स का सप्लायर कौन है? ये भी बताना पड़ता कि और किस-किस मेडिकल स्टोर पर ड्रग्स बिकती है? उससे ये भी पूछा जाता कि क्या उसे किसी का राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है? लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है। ये सवाल तो अभी भी पूछे जा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री भगवंत मान का ये बयान काफी नहीं है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी, उन्हें इस हत्या के पीछे के ड्रग माफ़िया को expose करना पड़ेगा। मेडिकल स्टोर्स पर बिकने वाले ड्रग्स की supply chain के बारे में जांच करानी होगी लेकिन समस्या ये है कि लोगों को पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है। इसीलिए CBI जांच की मांग की जा रही है। दूसरी बात ये है कि चूंकि पंजाब में चुनाव होने वाले हैं तो सारी राजनीतिक पार्टियां मुख्यमंत्री को घेरने में लगी हैं, कोई उनकी बात पर भरोसा नहीं करेगा।

जंतर मंतर पर प्रदर्शन: जनता की दिक्कत भी देखो

जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले हंगामे और प्रदर्शनों का एक दूसरा पहलू भी है। सरकार ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट के रूप में डिनोटिफाई कर दिया है। इस फैसले से सैकड़ों परिवारों ने राहत की सांस ली है। ये वो परिवार हैं, जिनकी दुकानें जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों में हैं, किसी का घर है, किसी का बिजनेस है। इन लोगों का कहना है कि प्रोटेस्ट के नाम पर जंतर-मंतर पर होने वाले हंगामे से उनका काम-धंधा चौपट हो रहा था।

जंतर-मंतर के आसपास रहने वालों और दुकान चलाने वालों की बात सुनकर तो साफ लगता है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से आम जनता को परेशानी होती है, व्यापारियों के काम का नुकसान होता है। लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अगर प्रदर्शन का मक़सद सिर्फ जगह घेरकर अराजकता फैला कर सरकार को मजबूर करना हो, तो वह प्रदर्शन लोकतंत्र के दायरे में नहीं आ सकता। प्रदर्शन करने की जगह कहां हो, कैसी हो, इसका फैसला कौन करेगा?

अगर ये प्रदर्शन करने वालों को तय करना है तो फिर उन्हें इस बात की ज़िम्मेदारी भी लेनी होगी कि सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से होगा, इलाक़े में रहने वालों और कारोबार करने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी। अगर प्रदर्शन करने वालों का लोकतांत्रिक अधिकार हैं तो फिर जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी होनी चाहिए।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 14 अक्टूबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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